धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत से मां दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इस अमावस्या को भारत के विभिन्न हिस्सों में ‘कुशोत्पाटिनी अमावस्या‘ या ‘कुशाग्रहणी अमावस्या‘ भी कहा जाता है।
पितृ तर्पण और दान
भाद्रपद माह की अमावस्या के दिन पितरों का तर्पण, दान और विशेष उपाय करने से जीवन के कष्ट, पितृदोष और मानसिक तनाव दूर होते हैं। सुबह स्नान के बाद जल में काले तिल मिलाकर दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके पितरों का तर्पण करें। इसके बाद किसी गरीब या जरूरतमंद को अन्न, वस्त्र, तिल और गुड़ का दान करें। शाम को पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं और 7 बार परिक्रमा करें। इससे पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और परिवार पर आया संकट टलता है।
संपूर्ण पंचांग: 10 सितंबर 2026, गुरुवार
तारीख और दिन : 10 सितंबर 2026, गुरुवार
आज का विशेष व्रत/त्योहार : भाद्रपद अमावस्या (पिठोरी अमावस्या), दर्शन अमावस, कुशोत्पाटिनी अमावस्या
विक्रम संवत : 2083
तिथि : अमावस्या (सुबह 10:04 तक), फिर भाद्रपद शुक्ल प्रतिपदा तिथि शुरू
नक्षत्र : मघा (दोपहर 01:43 तक), फिर पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र
पक्ष : कृष्ण पक्ष समाप्त, शुक्ल पक्ष शुरू
शुभ और अशुभ मुहूर्त
आज का विशेष व्रत/त्योहार : भाद्रपद अमावस्या (पिठोरी अमावस्या), दर्शन अमावस, कुशोत्पाटिनी अमावस्या
विक्रम संवत : 2083
तिथि : अमावस्या (सुबह 10:04 तक), फिर भाद्रपद शुक्ल प्रतिपदा तिथि शुरू
नक्षत्र : मघा (दोपहर 01:43 तक), फिर पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र
पक्ष : कृष्ण पक्ष समाप्त, शुक्ल पक्ष शुरू
शुभ और अशुभ मुहूर्त
सूर्योदय : 05:54 AM
सूर्यास्त : 06:21 PM
अभिजित मुहूर्त (शुभ समय): दोपहर 11:53 AM से दोपहर 12:43 PM तक (कोई भी नया या शुभ कार्य करने के लिए यह सबसे उत्तम समय है)
राहुकाल (अशुभ समय): दोपहर 01:51 PM से दोपहर 03:25 PM तक (इस समय कोई भी शुभ या मांगलिक कार्य शुरू न करें)
दिशाशूल : दक्षिण (गुरुवार के दिन दक्षिण दिशा में यात्रा करने से बचें)
भाग्यशाली अंक और रंग
सूर्यास्त : 06:21 PM
अभिजित मुहूर्त (शुभ समय): दोपहर 11:53 AM से दोपहर 12:43 PM तक (कोई भी नया या शुभ कार्य करने के लिए यह सबसे उत्तम समय है)
राहुकाल (अशुभ समय): दोपहर 01:51 PM से दोपहर 03:25 PM तक (इस समय कोई भी शुभ या मांगलिक कार्य शुरू न करें)
दिशाशूल : दक्षिण (गुरुवार के दिन दक्षिण दिशा में यात्रा करने से बचें)
भाग्यशाली अंक और रंग
शुभ रंग : पीला
शुभ अंक : 3
दैनिक राशिफल (10 सितंबर 2026)
मेष राशि : आज लंबे समय से अटका हुआ कोई महत्वपूर्ण काम पूरा होगा। कार्यक्षेत्र में आपके मान-सम्मान और पूछ-परख में वृद्धि होगी।
वृषभ राशि : आर्थिक मामलों में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा। किसी पुराने मित्र या करीबी रिश्तेदार से अचानक मुलाकात मन को प्रसन्न करेगी।
मिथुन राशि : जल्दबाजी में कोई नया वित्तीय निवेश करने से बचें। आज परिवार में किसी पुरानी बात को लेकर बहस या विवाद से दूर रहें।
कर्क राशि : वैवाहिक जीवन अत्यंत सुखमय रहेगा। व्यापार या बिजनेस के क्षेत्र में नई साझेदारी और प्रगति के रास्ते खुल सकते हैं।
सिंह राशि : बदलते मौसम के कारण स्वास्थ्य में उतार-चढ़ाव आ सकता है। खर्चों पर थोड़ा अंकुश लगाना आपके भविष्य के लिए जरूरी है।
कन्या राशि : विद्यार्थियों और प्रतियोगियों को आज कोई बड़ी खुशखबरी मिल सकती है। मन में सकारात्मक विचारों और उत्साह का प्रभाव रहेगा।
तुला राशि : भौतिक सुख-साधनों और सुख-सुविधाओं में वृद्धि होगी। माता-पिता के आशीर्वाद से कल कोई नया काम शुरू करना शुभ रहेगा।
वृश्चिक राशि : आपके पराक्रम, साहस और सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। कार्यक्षेत्र में छोटे भाई-बहनों का पूरा सहयोग प्राप्त होगा।
धनु राशि : आज आप धन संचय या बचत करने में पूरी तरह सफल रहेंगे। घर पर किसी विशेष मेहमान के आने से चहल-पहल रहेगी।
मकर राशि : समाज और कार्यक्षेत्र में आपकी मान-प्रतिष्ठा बढ़ेगी। आपके त्वरित निर्णय लेने की क्षमता की लोग खुलकर तारीफ करेंगे।
कुंभ राशि : व्यर्थ की दौड़भाग, तनाव और बेजा खर्च से बचें। आज ध्यान, पूजा और योग करने से आपको गहरी मानसिक शांति मिलेगी।
मीन राशि : आय के नए और अतिरिक्त स्रोत बनेंगे। कार्यक्षेत्र में बड़े भाई-बहनों से लाभ, मार्गदर्शन और सहयोग मिलने की पूरी संभावना है।
शुभ अंक : 3
दैनिक राशिफल (10 सितंबर 2026)
मेष राशि : आज लंबे समय से अटका हुआ कोई महत्वपूर्ण काम पूरा होगा। कार्यक्षेत्र में आपके मान-सम्मान और पूछ-परख में वृद्धि होगी।
वृषभ राशि : आर्थिक मामलों में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा। किसी पुराने मित्र या करीबी रिश्तेदार से अचानक मुलाकात मन को प्रसन्न करेगी।
मिथुन राशि : जल्दबाजी में कोई नया वित्तीय निवेश करने से बचें। आज परिवार में किसी पुरानी बात को लेकर बहस या विवाद से दूर रहें।
कर्क राशि : वैवाहिक जीवन अत्यंत सुखमय रहेगा। व्यापार या बिजनेस के क्षेत्र में नई साझेदारी और प्रगति के रास्ते खुल सकते हैं।
सिंह राशि : बदलते मौसम के कारण स्वास्थ्य में उतार-चढ़ाव आ सकता है। खर्चों पर थोड़ा अंकुश लगाना आपके भविष्य के लिए जरूरी है।
कन्या राशि : विद्यार्थियों और प्रतियोगियों को आज कोई बड़ी खुशखबरी मिल सकती है। मन में सकारात्मक विचारों और उत्साह का प्रभाव रहेगा।
तुला राशि : भौतिक सुख-साधनों और सुख-सुविधाओं में वृद्धि होगी। माता-पिता के आशीर्वाद से कल कोई नया काम शुरू करना शुभ रहेगा।
वृश्चिक राशि : आपके पराक्रम, साहस और सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। कार्यक्षेत्र में छोटे भाई-बहनों का पूरा सहयोग प्राप्त होगा।
धनु राशि : आज आप धन संचय या बचत करने में पूरी तरह सफल रहेंगे। घर पर किसी विशेष मेहमान के आने से चहल-पहल रहेगी।
मकर राशि : समाज और कार्यक्षेत्र में आपकी मान-प्रतिष्ठा बढ़ेगी। आपके त्वरित निर्णय लेने की क्षमता की लोग खुलकर तारीफ करेंगे।
कुंभ राशि : व्यर्थ की दौड़भाग, तनाव और बेजा खर्च से बचें। आज ध्यान, पूजा और योग करने से आपको गहरी मानसिक शांति मिलेगी।
मीन राशि : आय के नए और अतिरिक्त स्रोत बनेंगे। कार्यक्षेत्र में बड़े भाई-बहनों से लाभ, मार्गदर्शन और सहयोग मिलने की पूरी संभावना है।
‘पिठोरी’ शब्द ‘पीठ’ (आटा) से बना है। इस दिन आटे से देवियों की मूर्तियाँ बनाने की परंपरा के कारण इसे यह नाम मिला है। इस दिन मिट्टी की मूर्तियों की जगह आटे (गेहूं या चावल के आटे) से 64 योगिनियों और सप्तमात्रिकाओं की मूर्तियाँ बनाकर उनकी पूजा की जाती है। यह व्रत मुख्य रूप से माताएं अपनी संतान की लंबी आयु, स्वास्थ्य और समृद्धि के लिए करती हैं। जिन माताओं की संतान जीवित नहीं रहती या जिन्हें संतान सुख की प्राप्ति नहीं हो रही, उनके लिए यह व्रत बहुत प्रभावशाली माना गया है।
कुशोत्पाटिनी अमावस्या धार्मिक दृष्टि से इस दिन कुशा "एक प्रकार की पवित्र घास" को उखाड़ने या तोड़ने का विधान है। शास्त्रों के अनुसार, भाद्रपद अमावस्या को तोड़ी गई कुशा साल भर पवित्र रहती है और इसका उपयोग श्राद्ध, यज्ञ और पूजा में किया जाता है।
पिठोरी अमावस्या व्रत कथा
अपनी इस चिंता का निवारण खोजने के लिए शची, देवों के देव महादेव की अर्धांगिनी माता पार्वती के पास कैलाश पर्वत पर गईं। शची ने माता पार्वती को प्रणाम किया और हाथ जोड़कर बोलीं “हे जगदम्बा! आप तो पूरे संसार की माता हैं। कृपया मुझे कोई ऐसा व्रत या उपाय बताएं जिससे मेरी संतानों के जीवन पर आने वाले सभी संकट दूर हो जाएं और उन्हें एक लंबी और स्वस्थ आयु प्राप्त हो।”
माता शची की करुण पुकार सुनकर माता पार्वती मुस्कुराईं और बोलीं “हे इंद्राणी! भाद्रपद मास की अमावस्या संतान की रक्षा के लिए सबसे उत्तम दिन है। इसे पिठोरी अमावस्या कहा जाता है। तुम इस दिन पूर्ण निष्ठा से व्रत रखो।”
माता पार्वती ने शची को व्रत का विधान बताते हुए कहा "इस दिन तुम पवित्र जल से स्नान करना। उसके बाद शुद्ध आटे (पीठ) से 64 योगिनियों और मेरी (माता दुर्गा की) आकृतियां बनाना। उन्हें एक चौकी पर स्थापित कर, पूरे विधि-विधान से सुहाग की सामग्री और पुष्प अर्पित करना। आटे से बने पकवानों का भोग लगाना। यह व्रत संतानों के जीवन को हर प्रकार के रोग, शोक और अकाल मृत्यु से बचाता है।"
माता पार्वती के कहे अनुसार, माता शची (इंद्राणी) ने भाद्रपद अमावस्या के दिन पूरी श्रद्धा और कड़े नियमों के साथ 64 योगिनियों और माता पार्वती की आटे से मूर्तियां बनाकर पूजा की।
इस ‘पिठोरी अमावस्या’ के व्रत के प्रताप से माता शची की संतानों के सभी कष्ट हमेशा के लिए दूर हो गए और उन्हें उत्तम स्वास्थ्य व लंबी आयु प्राप्त हुई। तभी से यह मान्यता है कि जो भी माता इस पावन दिन पर अपने बच्चों के लिए यह व्रत करती है, उसकी संतान पर माता पार्वती और 64 योगिनियों की असीम कृपा हमेशा बनी रहती है।
आज का अनमोल सुविचार
॥ आज का महामंत्र ॥
पितृ गायत्री महामंत्र (पितृ दोष मुक्ति के लिए)
पिठोरी अमावस्या की व्रत कथा अत्यंत प्राचीन है, जिसका वर्णन स्वयं माता पार्वती ने देवराज इंद्र की पत्नी शची (इंद्राणी) को सुनाया था। पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार देवराज इंद्र की पत्नी माता शची (इंद्राणी) अत्यंत दुखी थीं। उनकी संतानों को किसी न किसी प्रकार का कष्ट लगा रहता था और वे अपनी संतानों के स्वास्थ्य व सुरक्षा को लेकर बहुत चिंतित रहती थीं।
अपनी इस चिंता का निवारण खोजने के लिए शची, देवों के देव महादेव की अर्धांगिनी माता पार्वती के पास कैलाश पर्वत पर गईं। शची ने माता पार्वती को प्रणाम किया और हाथ जोड़कर बोलीं “हे जगदम्बा! आप तो पूरे संसार की माता हैं। कृपया मुझे कोई ऐसा व्रत या उपाय बताएं जिससे मेरी संतानों के जीवन पर आने वाले सभी संकट दूर हो जाएं और उन्हें एक लंबी और स्वस्थ आयु प्राप्त हो।”
माता शची की करुण पुकार सुनकर माता पार्वती मुस्कुराईं और बोलीं “हे इंद्राणी! भाद्रपद मास की अमावस्या संतान की रक्षा के लिए सबसे उत्तम दिन है। इसे पिठोरी अमावस्या कहा जाता है। तुम इस दिन पूर्ण निष्ठा से व्रत रखो।”
माता पार्वती ने शची को व्रत का विधान बताते हुए कहा "इस दिन तुम पवित्र जल से स्नान करना। उसके बाद शुद्ध आटे (पीठ) से 64 योगिनियों और मेरी (माता दुर्गा की) आकृतियां बनाना। उन्हें एक चौकी पर स्थापित कर, पूरे विधि-विधान से सुहाग की सामग्री और पुष्प अर्पित करना। आटे से बने पकवानों का भोग लगाना। यह व्रत संतानों के जीवन को हर प्रकार के रोग, शोक और अकाल मृत्यु से बचाता है।"
माता पार्वती के कहे अनुसार, माता शची (इंद्राणी) ने भाद्रपद अमावस्या के दिन पूरी श्रद्धा और कड़े नियमों के साथ 64 योगिनियों और माता पार्वती की आटे से मूर्तियां बनाकर पूजा की।
इस ‘पिठोरी अमावस्या’ के व्रत के प्रताप से माता शची की संतानों के सभी कष्ट हमेशा के लिए दूर हो गए और उन्हें उत्तम स्वास्थ्य व लंबी आयु प्राप्त हुई। तभी से यह मान्यता है कि जो भी माता इस पावन दिन पर अपने बच्चों के लिए यह व्रत करती है, उसकी संतान पर माता पार्वती और 64 योगिनियों की असीम कृपा हमेशा बनी रहती है।
आज का अनमोल सुविचार
"ज्ञान से बड़ा कोई धन नहीं है, और अज्ञानता से बड़ा कोई अंधकार नहीं है।"
॥ आज का महामंत्र ॥
पितृ गायत्री महामंत्र (पितृ दोष मुक्ति के लिए)
"ॐ पितृगणाय विद्महे जगत्धारिणे धीमहि तन्नो पितृ प्रचोदयात्।"
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