कृष्ण भजन
कैसे कहूँ तुम करुणा सागर,
कैसे कहूँ दीन के नाथ।
कितने जनम अब बीत गए हैं,
कितने जनम अब बीत गए मेरे,
घनश्याम चरण की आस,
कैसे कहूँ तुम करुणा सागर,
कैसे कहूँ दीन के नाथ।
कैसे कहूँ तुम अन्तर्यामी,
मन भागे मेरा क्यों दिन-रात।
लगाम मन का छोड़ा जो तुमने,
गिर पड़े हो के हताश,
कैसे कहूँ तुम करुणा सागर,
कैसे कहूँ दीन के नाथ।
कैसे कहूँ तुम जीवन साथी,
छोड़ा तुमने मेरा हाथ।
भटक रही हूँ चारों दिशा में,
करती तुम्हारी तलाश,
कैसे कहूँ तुम करुणा सागर,
कैसे कहूँ दीन के नाथ।
कैसे कहूँ तुम करुणा सागर,
कैसे कहूँ दीन के नाथ।
कितने जनम अब बीत गए हैं,
कितने जनम अब बीत गए मेरे,
घनश्याम चरण की आस,
कैसे कहूँ तुम करुणा सागर,
कैसे कहूँ दीन के नाथ।
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