कृष्ण भजन
हे... द्वारकाधीश...
हे जगत मंदिर के स्वामी....
मथुरा छोड़ी, गोकुल छोड़ा,
ताकि भक्तों का भार उठा सकूं।
सागर के बीच बसाई तुमने,
ये कंचन की सरकार...
प्रभु.. एक बार निहार लो...
सागर चरण पखारे नित,
गोमती करे प्रणाम,
सोने की लंका नहीं,
ये है सोने का धाम,
मेरो द्वारिका धाम।
चलो मन द्वारिका नगरी,
चलो मन द्वारिका नगरी,
जहां विराजे रणछोड़,
माया का बंधन तोड़,
चलो उस कंचन द्वार की ओर,
चलो मन द्वारिका नगरी,
जहां विराजे रण छोड़,
माया का बंधन तोड़,
चलो उस कंचन द्वार की ओर।
वहां राजा बनकर बैठे हैं...
वहां राजा बनकर बैठे हैं,
मेरे नंद किशोर...
चलो मन द्वारिका नगरी।
सागर की लहरें उठ-उठ कर,
जहां चरण पखारन आती है।
गोमती मैया पावन जल से,
नित आरती सजाती है।
सूरज की पहली किरणें जब,
कलशों को छू कर जाती है।
ऐसा लगता बैकुंठ भूमि ही,
धरती पर उतर आती है।
जहां छप्पन भोग का थाल सजे,
जहां छप्पन भोग का थाल सजे,
और माखन माटी मोल,
चलो मन द्वारिका नगरी।
सुदामा से मित्र के खातिर,
जहां राजपाट ठुकराते हैं,
जहां राजपाट ठुकराते हैं,
दौड़ पड़े नंगे पांव प्रभु,
जब भक्त द्वार पर आते हैं।
तू राजाओं का राजा है,
पर भाव का भूखा रहता है।
जो सच्चे मन से टेर लगाए,
तू उसकी पीड़ा हरता है।
मेरे नैनों में दर्शन की प्यास,
मेरे नैनों में दर्शन की प्यास,
सब नैनों के पट खोल,
चलो मन द्वारिका नगरी।
जय द्वारकाधीश, जय रणछोड़राय,
जय त्रिकमजी, जय जगत मंदिर के साय...
जय द्वारकाधीश, जय रणछोड़राय,
जय त्रिकमजी, जय जगत मंदिर के साय।
मेरी नाव भंवर में अटती है,
आकर के पार लगा जाओ,
हे मोर मुकुट, हे पीतांबर,
एक बार झलक दिखला जाओ।
जय जय श्री कृष्ण, जय जय श्री कृष्ण,
जय जय गोविंद, जय जय गोपाल,
राधा रमण हरि, जय जय गोविंद।
चलो मन द्वारिका नगरी,
चलो मन द्वारिका नगरी,
जहां विराजे रणछोड़,
माया का बंधन तोड़,
चलो उस कंचन द्वार की ओर,
चलो मन द्वारिका नगरी,
जहां विराजे रण छोड़,
माया का बंधन तोड़,
चलो उस कंचन द्वार की ओर।
जय द्वारकाधीश, जय रणछोड़राय,
जय त्रिकमजी, जय जगत मंदिर के साय...
जय द्वारकाधीश, जय रणछोड़राय,
जय त्रिकमजी, जय जगत मंदिर के साय।
मेरी नाव भंवर में अटती है,
आकर के पार लगा जाओ,
हे मोर मुकुट, हे पीतांबर,
एक बार झलक दिखला जाओ।
जय जय श्री कृष्ण, जय जय श्री कृष्ण,
जय जय गोविंद, जय जय गोपाल,
राधा रमण हरि, जय जय गोविंद।
चलो मन द्वारिका नगरी,
चलो मन द्वारिका नगरी,
चलो मन.....

Hi Please, Do not Spam in Comments