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प्रभु भजन
सबको सुमिरन नित करते हो,
मुझे ही क्यों तुम भूल गए,
मुझे ही क्यों तुम भूल गए,
मुझे ही क्यों तुम भूल गए॥
राम नाम जो ना कह पाया,
उस अनपढ़ ऋषि बनाया।
रामायण का पाठ पढ़ाया,
मुनि वाल्मीकि अमर हुए॥
सबको सुमिरन नित करते हो,
मुझे ही क्यों तुम भूल गए,
मुझे ही क्यों तुम भूल गए,
मुझे ही क्यों तुम भूल गए॥
सती अहिल्या श्राप मुक्त की,
भेंट अनोखी माँ शबरी की।
सत्व परीक्षा धर्मपत्नी की,
आदर्श प्रभु का मन भाए॥
सबको सुमिरन नित करते हो,
मुझे ही क्यों तुम भूल गए,
मुझे ही क्यों तुम भूल गए,
मुझे ही क्यों तुम भूल गए॥
राम नाम की अक्षय महति,
भक्त गणों की संचित शक्ति।
पवन पुत्र की श्रद्धा भक्ति,
मुझे तुम्हारी याद दिलाए॥
सबको सुमिरन नित करते हो,
मुझे ही क्यों तुम भूल गए,
मुझे ही क्यों तुम भूल गए,
मुझे ही क्यों तुम भूल गए॥
कथा निराली है कलयुग की,
हुई दुर्दशा यहाँ सत्य की।
याद भुला दी रामायण की,
अपने आप को भूल गए॥
सबको सुमिरन नित करते हो,
मुझे ही क्यों तुम भूल गए,
मुझे ही क्यों तुम भूल गए,
मुझे ही क्यों तुम भूल गए॥
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