.jpeg)
दरसन बिना बहुत दिन बीते,
सुंदर प्रीतम मोर॥
प्राण कठोर,
अजहूँ न निकसै प्राण कठोर॥
🎧 "अजहूँ न निकसै प्राण" भजन को सीधे यहीं सुनें:
चारि पहर चारों युग बीते,
रैनि गँवाई भोर॥
अवधि गई अजहूँ नहिं आये,
कतहूँ रहे चित चोर॥
दरसन बिना बहुत दिन बीते,
सुंदर प्रीतम मोर॥
प्राण कठोर,
अजहूँ न निकसै प्राण कठोर॥
कबहूँ नैन निरखि नहिं देखे,
मारण चितवन तोर॥
दादू ऐसे आतुर बिरहणि,
जैसे चंद चकोर॥
प्राण कठोर,
अजहूँ न निकसै प्राण कठोर॥
दरसन बिना बहुत दिन बीते,
सुंदर प्रीतम मोर॥
प्राण कठोर,
अजहूँ न निकसै प्राण कठोर॥
Hi Please, Do not Spam in Comments