श्री कृष्ण भजन
जिस बंसी में प्रेम भरा है।
वो कृष्णा के पास।
मोक्ष भरा वो बाँस का टुकड़ा।
पतझड़ में मधुमास।
जिस बंसी में प्रेम भरा है॥
श्याम की भक्ति सुर में, स्वर में।
वेद श्लोक सब साथ,
गिरधर नागर छैल-छबीले।
नटवर लाला लाल,
कृष्ण की बंसी,
कृष्ण की बंसी, जहाँ-जहाँ है,
कृष्णा उनके पास,
पतझड़ में मधुमास,
जिस बंसी में प्रेम भरा है।
वो कृष्णा के पास।
जिस बंसी में प्रेम भरा है॥
सा रे गा मा पा धा नि सा आ...
सा रे गा मा पा धा नि सा
सात स्वरों में तीन लोक है।
तीन देव इक ब्रम्ह,
सर्वाकर्षण कृष्ण का दर्शन।
कर ले कर ले हम,
अनुराधा...
अनुराधा सुध-बुध खो बैठी,
सुर जीवन की साँस,
पतझड़ में मधुमास,
जिस बंसी में प्रेम भरा है।
वो कृष्णा के पास।
जिस बंसी में प्रेम भरा है॥
भक्त मगन है वन-वन डोले।
जहाँ श्याम स्वर गूंजा
गीता का सन्देश कृष्ण का।
बंसी स्वर में भीजा,
हरी नारायण...
हरी नारायण करे साधना,
कृष्ण चरण बन दास,
पतझड़ में मधुमास,
जिस बंसी में प्रेम भरा है॥
जिस बंसी में प्रेम भरा है,
वो कृष्णा के पास।
मोक्ष भरा वो बाँस का टुकड़ा।
पतझड़ में मधुमास।
जिस बंसी में प्रेम भरा है॥
