श्याम बाबा भजन
तेरी कृपा में कमी नहीं है,
मेरा भरोसा ही डगमगाए,
तू साथी बनकर है चलने वाला,
मुझे ही छाया नज़र ना आए,
तू साथी बनकर है चलने वाला,
मुझे ही छाया नज़र ना आए।।
दयालु तू है तेरी दया का,
बखान करना बहुत कठिन है,
है लाखों किस्से तेरे करम के,
ये छोटी वाणी ना बोल पाएं,
तेरी कृपा में कमीं नही है,
मेरा भरोसा ही डगमगाए,
तू साथी बनकर है चलने वाला,
मुझे ही छाया नज़र ना आए।।
सबका साथी है तू मेरे बाबा श्याम,
जिसने चाहा तुझे उसने पाया तुझे।
है कैसा मेरा नमन ये बाबा,
मैं क्या बताऊँ तुझे पता है,
है मेरा मतलब जो सर झुका है,
तू देखकर के भी भूल जाए,
तेरी कृपा में कमीं नही है,
मेरा भरोसा ही डगमगाए,
तू साथी बनकर है चलने वाला,
मुझे ही छाया नज़र ना आए।।
मैं भूल जाऊं, तू याद रखता,
मैं गिर भी जाऊं तो थाम ले तू,
दिया है तूने जो प्रेम इतना,
शरम से आँखे ये उठ ना पाए,
तेरी कृपा में कमीं नही है,
मेरा भरोसा ही डगमगाए,
तू साथी बनकर है चलने वाला,
मुझे ही छाया नज़र ना आए।।
सबका साथी है तू मेरे बाबा श्याम,
जिसने चाहा तुझे उसने पाया तुझे।
तेरी नज़र में रहे ये ‘पंकज’,
मैं जब चलूँ वो तेरे कदम हो,
भली हो चाहे बुरी हो राहें,
है तेरी मर्जी जिधर चलाए,
तेरी कृपा में कमीं नही है,
मेरा भरोसा ही डगमगाए,
तू साथी बनकर है चलने वाला,
मुझे ही छाया नज़र ना आए।।
तेरी कृपा में कमी नहीं है,
मेरा भरोसा ही डगमगाए,
तू साथी बनकर है चलने वाला,
मुझे ही छाया नज़र ना आए,
तू साथी बनकर है चलने वाला,
मुझे ही छाया नज़र ना आए।।
