प्रभु भजन
भगवान मुझे भी अपना लो,
मैं शरण तुम्हारी आयी हूँ,
ये न देखो मैं कैसी हूँ,
ये न देखो क्या लायी हूँ,
भगवान मुझे भी अपना लो॥
पापी दीन-दुःखी हूँ मैं,
दीन-बन्धु तुम कहलाते हो,
सुनती हूँ बड़े हो दयालू,
दुःखियों को गले लगाते हो॥
ये नीरस जीवन आस नहीं,
सुख चैन नहीं घबरायी हूँ,
ये न देखो क्या लायी हूँ,
भगवान मुझे भी अपना लो॥
उलझी रहती हूँ माया में,
नित नाम तुम्हारा भजती हूँ,
प्यारे हैं जितने काम तुम्हें,
उन कामों को करती हूँ॥
मत भटकाओ उद्धार करो,
मैं द्वार तुम्हारे आयी हूँ,
ये न देखो मैं कैसी हूँ,
ये न देखो क्या लायी हूँ,
भगवान मुझे भी अपना लो,
मैं शरण तुम्हारी आयी हूँ॥
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