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राम भजन
धोना था मन भूल गया तू ,
धोता रहा तन मल-मल के,
घर का ईश्वर भूल गया तू,
तीरथ करता चल-चल के,
धोना था मन भूल गया तू ,
धोता रहा तन मल-मल के।
प्रात काल उठ के रघुनाथा,
मात पिता गुरु नावही माथा।
सब देवों के दर्शन करलो,
हाथ जोड़ कर वंदन करलो,
मात पिता गुरु का पूजन ही,
हर तीरथ से बढ़ चढ़ के,
घर का ईश्वर भूल गया तू,
तीरथ करता चल-चल के,
धोना था मन भूल गया तू ,
धोता रहा तन मल-मल के।
धरमु न दूसर सत्य समाना,
आगम निगम पुरान बखाना।
सत्य से बढ़ कर धर्म ना कोई,
झूठ से बड़ा अधर्म ना कोई,
मन वाणी से सत्य बोल नित,
पाप मिटेंगे इक-इक करके,
घर का ईश्वर भूल गया तू,
तीरथ करता चल-चल के,
धोना था मन भूल गया तू ,
धोता रहा तन मल-मल के।
अवध तहाँ जहँ राम निवासू,
तहँइँ दिवसु जहँ भानु प्रकासु।
जिस मन में बसते श्री राम,
वो तन बने अयोध्या धाम,
जहाँ जले श्री राम की ज्योति,
मिटे अँधेरे तन मन के,
घर का ईश्वर भूल गया तू,
तीरथ करता चल-चल के,
धोना था मन भूल गया तू ,
धोता रहा तन मल-मल के।
प्रात काल उठ के रघुनाथा,
मात पिता गुरु नावही माथा।
धरमु न दूसर सत्य समाना,
आगम निगम पुरान बखाना।
अवध तहाँ जहाँ राम निवासू,
तहँइँ दिवसु जहाँ भानु प्रकासु।
