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गणेश भजन
हे प्रारम्भ अधिपति,
हे गणराज।
ये जीवन संवारो,
दर्शन दो आज।
दर्शन दो, दर्शन दो,
दर्शन दो आज॥
तुम रहो सम्मुख तो,
मिट जाये हर दुःख।
उच्चारु नाम तुम्हारा,
निहारु तब मुख।
हो जाये सम्पन्न,
हर एक शुभ काज।
ये जीवन संवारो,
दर्शन दो आज।
दर्शन दो, दर्शन दो,
दर्शन दो आज॥
आशीष तुम्हारा मिले,
मंगलमूर्ति।
मिल जाये जीते जी,
कर्मों से मुक्ति।
कर दू चरण अर्पण,
अहम का ताज।
ये जीवन संवारो,
दर्शन दो आज।
दर्शन दो, दर्शन दो,
दर्शन दो आज॥
अथ से निकली है,
महाकाल की धारा।
ओमकार में समाया,
जो नाम तुम्हारा।
गूँजें मन मंदिर,
गूँजें दूरदराज़।
ये जीवन संवारो,
दर्शन दो आज।
दर्शन दो, दर्शन दो,
दर्शन दो आज॥
हे प्रारम्भ अधिपति,
हे गणराज।
ये जीवन संवारो,
दर्शन दो आज।
दर्शन दो, दर्शन दो,
दर्शन दो आज॥