चूहा बोला गणराजा से,
सुनलो बात हमारी रे,
पहले मोरी शादी करादों,
करियों तब ही सवारी।।
तन-मन से हे स्वामी हमने,
सेवा करी मनमानी,
अपने दास की तुमने प्रभुजी,
तनको कदर ना जानी,
हमके स्वामी सब मालूम है,
दो-दो पत्नी तुम्हारी,
पहले मोरी शादी करादों,
करियों तब ही सवारी।।
रिध्दि-सिध्दि के गणराजा,
बन गए हो तुम मालिक,
कछु बरस में झोली भर गई,
हो गए दो दो बालक,
मोरो भी परिवार बसा दो,
मारे लाल किलकारी रे,
पहले मोरी शादी करादों,
करियों तब ही सवारी।।
शुभ और लाभ के संग में,
स्वामी खेले मेरो लालन,
जैसी आज्ञा हम मानत है,
वो भी करे पालन,
लम्बोदर विघ्नो के हरेया,
जाने दुनिया सारी रे,
पहले मोरी शादी करादों,
करियों तव ही सवारी।।
गणराजा गौरी के नन्दन,
विनय करे वेनाम,
मनचाहा फल दो चूहा को,
सफल हो सब काम,
सब देवों मे प्रथम पुज रहे,
देवो के अधिकारी रे,
पहले मोरी शादी करादों,
करियों तब ही सवारी
चूहा बोला गणराजा से,
सुनलो बात हमारी रे,
पहले मोरी शादी करादों,
करियों तब ही सवारी।।

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