
हनुमान भजन
केसरी सुत बजरंगबली, रक्षक दया निधान,
चिंता हर के चिंतक की, दे दीजो अभयदान,
कष्ट हरण तेरी प्रतिमा को, कोटि-कोटि प्रणाम,
अंजनी नंदन भयमोचन, सिद्ध करो सब काम,
भक्त रहे आनंद मगन, निकट ना आये विषाद,
हर साधक के घर गूंजें, हर्ष का सुखमय नाद,
श्री राम जय जय राम, सीताराम जय जय राम।
🎧 "केसरी सुत बजरंगबली रक्षक दया निधान" हनुमान भजन को सीधे यहीं सुनें:
तेरी अलौकिक भक्ति से, सुधरे लोक-परलोक,
क्षण में लुप्त है हो जाता, हर एक मन का शोक,
शक्ति के हे महासागर, हमें भी शक्ति दो,
भूले-भटके पथिकों को, अपनी शरण में लो,
रामदूत सिद्ध महायोगी, महाबली पवन कुमार,
केवट बनकर ये नौका, कर दो भव से पार,
श्री राम जय जय राम, सीताराम जय जय राम।
रघुवर धुन में आप सदा, सुध-बुध जाते खो,
रोम-रोम में हम सब के, वही मस्ती भर दो,
करुण सुधा से धो दीजो, मन का मैला काठ,
अपने उपासक पर कभी, आने ना देना आंच,
देवों के वंदित रामचरण, पावन स्वर्ग समान,
हमें भी उन तक ले चलो, हनुमत कष्ट निदान,
श्री राम जय जय राम, सीताराम जय जय राम।
जैसी अद्भुत लीला से, सुखी किया सुग्रीव,
वैसी ही करुणा मांगते, धरती के सुखी जीव,
स्वर्णमणि सा चमकता, भक्ति युक्त शरीर,
उस ज्योति से पीर हरो, भक्तों के महावीर,
जानकीवल्लभ के प्यारे, महासेवक हनुमान,
धन, वैभव, यश, मान का, देना हमें वरदान,
श्री राम जय जय राम, सीताराम जय जय राम।
स्पर्श तुम्हारे से माटी, चन्दन जाती हो,
शरणागति में हम आए, हम पर दया करो,
बलवानो के श्री मणि, भक्तों के सिर मौर,
दीन हीन हम दुखियों के, थामे रहियो डोर,
अनुपम छटा के हे स्वामी, शंकर के अवतार,
पलक झपकते ही देना, बिगड़े काज सवाँर,
श्री राम जय जय राम, सीताराम जय जय राम।
पवन हिंडोला झूलते, कपि वर पवन के लाल,
कवच हमारे बन जाना, रहना सदा दयाल,
मुनिजन दुर्लभ चरण कमल, पर दिया माथा टेक,
संकट मोचन नाथ हमें, दया दृष्टि से देख,
विनय शील हर याचक की, हनुमत रखियो लाज,
सदा सहायक ही रहना, दुखियो के कपिराज,
श्री राम जय जय राम, सीताराम जय जय राम।
जिनके मुख में रहे सदा, हनुमत तेरा नाम,
वो ना कभी भी हारते, जीवन का संग्राम,
हमको तुम्ही से सीखना, मर्यादा का पाठ,
इसी लिए तो नैन सदा, तेरी निहारे बाट,
पावन शुद्ध अनुराग से, करते तुम्हारा जाप,
मन भवन के कोने में, रहे ना जरा भी पाप,
श्री राम जय जय राम, सीताराम जय जय राम।
धर्म की चर्चा होए जहाँ, वहाँ तुम्हारा वास,
उन्नति शिखर पर वे पहुंचे, तुम पे जिन्हे विश्वास,
दहन की लंका पाप की, तुम्हीं ने पवन कुमार,
कपट गठरिया का पल में, कर दिया हल्का भार,
हिंसा, क्रोध, कुकर्मों के, तुम्हीं कुचलते नाग,
कर्म के जल से सींचते, दया, धर्म का बाग,
श्री राम जय जय राम, सीताराम जय जय राम।
अमृत कलश के जैसा है, ह्रदय तेरा हनुमान,
ज्ञान सुधा से धो देना, हर मन का अज्ञान,
जग में तनिक असंभव ना, तेरे लिए कोई काम,
तुम हो सागर लांघते, लेकर राम का नाम,
त्रिभुवन पति रघुनाथ के, तुम्हीं ने कष्ट हरे,
तेरे अराधन से खोटे, प्राणी होवे खरे,
श्री राम जय जय राम, सीताराम जय जय राम।
हे जग तारक कपिश्वर, पवन चला सुख का,
निज अनुकंपा से करना, पतितों का उद्धार,
मोती बना लो कंकण को, सच्चिदानंद के दूत,
तेरे उपासक के घर में, प्रेत रहे ना भूत,
क्षणिका को निवारते, भजन तेरे महावीर,
दुःख दारिद्र के हम पर, चलने ना देना तीर,
श्री राम जय जय राम, सीताराम जय जय राम।
पढ़ा जिन्होंने श्रद्धा से, निसदिन बजरंग बाण,
उनकी पल में हो गयी, हर मुश्किल आसान,
लाने गए संजीवनी तो, पर्वत लिया उठा,
सुगम बनाना दुर्गम को, हनुमत तेरी कला,
भक्त विभीषण को तेरा, तार गया उपदेश,
राम की करुणा होते ही, बन गया वो लंकेश,
श्री राम जय जय राम, सीताराम जय जय राम।
स्मरण तुम्हारा कर देता, दुखियों का कल्याण,
मोक्ष की राहें खोलता, बजरंग तेरा ध्यान,
तेरे सुमिरण पूजन से, मिलता दिव्य आनंद,
श्वास-श्वास में भर जाती, मीठी प्रेम सुगंध,
निष्ठा, लगन से जो तेरी, लेते है माला फेर,
रोग, शोक, संताप उन्हें, कभी ना सकते घेर,
श्री राम जय जय राम, सीताराम जय जय राम,
श्री राम जय जय राम, सीताराम जय जय राम,
श्री राम जय जय राम, सीताराम जय जय राम,
श्री राम जय जय राम, सीताराम जय जय राम,
श्री राम जय जय राम, सीताराम जय जय राम....
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