शिव भजन
रूप विकराल, जटा विशाल, चंद्र विराजे भाल,
नैनों से झलकता प्यार, जग हो जाए निहाल,
तांडव जब प्रचंड रचे शिव, त्रिनेत्र में हो ज्वाल,
कंठ नील में विष समेटे, खड़े कैलाश पर महाकाल।
बोलो हर हर हर, बोलो हर हर महाकाल...
गूँजे धरा अंबर पाताल, बोलो हर हर महाकाल...
बोलो हर हर हर, बोलो हर हर महाकाल...
गूँजे धरा अंबर पाताल, बोलो हर हर महाकाल...
रूप विकराल, जटा विशाल, चंद्र विराजे भाल,
नैनों से झलकता प्यार, जग हो जाए निहाल,
तांडव जब प्रचंड रचे शिव, त्रिनेत्र में हो ज्वाल,
कंठ नील में विष समेटे, खड़े कैलाश पर महाकाल।
बोलो हर हर हर, बोलो हर हर महाकाल...
गूँजे धरा अंबर पाताल, बोलो हर हर महाकाल...
डमरू की धुन से गूँजे नभ, हर हर की हो पुकार,
भस्म रमाए अंग अंग में, राखे कृपा दृष्टि अपार,
हिमगिरी शिखर से दे रहे, जग हो दिव्य उजाल,
भक्तों के रक्षक बन विराजे, त्रिलोकी महाकाल।
बोलो हर हर हर, बोलो हर हर महाकाल...
गूँजे धरा अंबर पाताल, बोलो हर हर महाकाल...
नंदी संग विराजे शंकर, लुटाए स्नेह अपरंपार,
भक्तों की हर श्वास में बसते, भोलेनाथ त्रिपुरार,
हे नटराज, हे शंभु शंकर, रख लेना संभाल,
रौद्र रूप में आ प्रकटे, स्वयं शिव महाकाल।
बोलो हर हर हर, बोलो हर हर महाकाल...
गूँजे धरा अंबर पाताल, बोलो हर हर महाकाल...
रुद्राक्ष की माला पहने, सर्प गले का हार,
दुष्टों के संहारक स्वामी, भक्तों के आधार,
गंगा की धारा कल कल करती, उलझी जटा के जाल,
रुद्र तांडव रचने वाले, जय जय जय शिव महाकाल।
बोलो हर हर हर, बोलो हर हर महाकाल...
गूँजे धरा अंबर पाताल, बोलो हर हर महाकाल...
डमरू बाजे डिम डिम भीषण, थिरक उठे आकाश,
पद चापों से धरती कांपे, मिटे मोह का पाश,
भस्म लगाए कपाल, थर्राये त्रिभुवन त्रिकाल,
तू ही हो मेरे महादेव, तुम ही तो हो महाकाल,
बोलो हर हर हर, बोलो हर हर महाकाल...
गूँजे धरा अंबर पाताल, बोलो हर हर महाकाल...
बोलो हर हर हर, बोलो हर हर महाकाल...
गूँजे धरा अंबर पाताल, बोलो हर हर महाकाल...
बोलो हर हर हर, बोलो हर हर महाकाल...
गूँजे धरा अंबर पाताल, बोलो हर हर महाकाल...
रूप विकराल, जटा विशाल, चंद्र विराजे भाल,
नैनों से झलकता प्यार, जग हो जाए निहाल,
तांडव जब प्रचंड रचे शिव, त्रिनेत्र में हो ज्वाल,
कंठ नील में विष समेटे, खड़े कैलाश पर महाकाल।
