प्रभु भजन
हरि... हरि... हरि...
हरि... हरि... हरि...
भज ले प्यारे हरि को,
भज ले मन हरि को,
और कुछ ना जान,
भज ले बस हरि को।
सांस चले तो हरि याद आए,
मन भटके तो हरि नाम,
जग की बातें बहुत हुई,
अब थाम ले हरि का काम,
जो मिला है वो जाएगा,
जो गया वो लौटे ना,
जो सदा संग रहता है,
उस हरि को छोड़ मत दे,
भज ले प्यारे हरि को,
भज ले मन हरि को।
दिन ढले या रात गहरी,
सुख हो या संताप,
हर हाल में हरि साथ है,
यही सबसे बड़ी बात,
न गिन अपने दोष बहुत,
ना गुणों का भार,
हरि नाम में टिक जा बस,
कट जाए हर विचार,
भज ले प्यारे हरि को,
और कुछ ना जान।
हरि ना पूछे कौन है तू,
हरि ना देखे मान,
जो भी हरि का नाम ले,
वो हरि का संतान,
मन की गठरी खोल दे,
चिंता सब उतार,
हरि के चरणों में रख दे,
जीवन का हर भार,
भज ले प्यारे हरि को,
भज ले बस हरि को।
जब मन बोले "अब नहीं होगा"
नाम ले हरि का एक,
एक नाम में बल इतना,
टूट जाए हर संदेह,
जो उलझन मन में बैठी,
हरि नाम से ढल जाए,
धीरे-धीरे बिना कहे,
सब कुछ ठीक हो जाए,
भज ले प्यारे हरि को,
भज ले मन हरि को।
कल की चिंता छोड़ दे,
आज में रह जा यार,
आज की सांस हरि की देन,
आज ही है उपहार,
ना मंदिर ढूंढ, ना दिशा,
ना पूछ विधि, ना भेद,
जहां हरि का नाम जपे,
वहीं मिटे हर खेद,
भज ले प्यारे हरि को,
और कुछ ना जान।
हरि नाम कोई बोझ नहीं,
हरि नाम विश्राम,
चलते-चलते थक जाए जो,
उसे मिले आराम,
ना ऊंचा होना, ना बड़ा,
ना जग से आगे जाना,
हरि के नाम में टिक जाना,
बस इतना ही जानना,
भज ले प्यारे हरि को,
भज ले मन हरि को,
और कुछ ना जान,
और कुछ ना जान
भज ले बस हरि को।
जब कुछ समझ ना आए तुझे,
जब मन हो बेहाल,
एक नाम ही काफी है,
हरि नाम बेमिसाल,
धीरे-धीरे समझ आएगा,
बिना बोले, बिना शोर,
भज ले प्यारे हरि को,
बस यही जीवन का जोर,
भज ले प्यारे हरि को,
भज ले मन हरि को,
और कुछ ना जान,
भज ले बस हरि को,
हरि... हरि... हरि...
हरि... हरि... हरि...
