गणेश भजन
थोड़े भोले, थोड़े जिद्दी,
इनका अपना ही रंग।।
मां की आज्ञा का पालन कर,
अड़ गए पिता के संग।
ओ गणपति देवा, ओ गणपति देवा।।
पहरे दार बनाकर माता,
छोड़ गई जब द्वारे।
कुछ ही क्षण में शिव शंकर,
जब घर की ओर पधारे।
ओ गणपति देवा, ओ गणपति देवा।।
अपने ही घर में निषेध सुनकर,
रह गए वो भी दंग।
मां की आज्ञा का पालन कर,
अड़ गए पिता के संग।
ओ गणपति देवा, ओ गणपति देवा।।
कोई भेद और भाव नहीं,
सुनते सबकी एकदन्ता।
जो भी बिगडा काम बने ना,
उनके द्वारे बंता।
ऐसी उनकी अपार शक्ति,
ऐसा उनका ढ़ंग।
मां की आज्ञा का पालन कर,
अड़ गए पिता के संग।
ओ गणपति देवा, ओ गणपति देवा।।
सबको गले लगाते,
जो भी उनकी शरण में आया।
रूप किया धारण जब क्रोध का,
कोई बच ना पाया।
ओ गणपति देवा, ओ गणपति देवा।।
जब तक उनको मना ना ले हम,
रहे ये जीवन तंग।।
मां की आज्ञा का पालन कर,
अड़ गए पिता के संग।
ओ गणपति देवा, ओ गणपति देवा,
ओ गणपति देवा, ओ गणपति देवा।।
गणपति देवा, गणपति देवा, गणपति देवा
ओ गणपति देवा, ओ गणपति देवा।।
