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राम भजन
मन राम सुमिर पछतायेगा ।
पापी जियरा लोभ करत है,
आज कल उठ आएगा ।
मन राम सुमिर पछतायेगा ।
लालच लागे जनम गँवायो,
माया भरम लुभायेगा ।
धन जोबन का लोभ न करिये,
कागज सा गल जायेगा ।
मन राम सुमिर पछतायेगा ।
सुमरन भजन दया नहिं किन्ही,
ता मुख चाटे खायेगा ।
धर्मराज जब लेखा माँगे,
क्या मुख लेकर जायेगा ।
मन राम सुमिर पछतायेगा ।
कहत कबीर सुनो भाई साधो,
संग-संग तर जायेगा ।
मन राम सुमिर पछतायेगा ।
मन राम सुमिर पछतायेगा ।
पापी जियरा लोभ करत है,
आज कल उठ आएगा ।
मन राम सुमिर पछतायेगा ।
