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श्री कृष्ण भजन
बरसे बदरिया सावन की।
सावन की मन भावन की।
बरसे बदरिया सावन की॥
सावन में उमंगयो मेरो मनवा।
भनक सुनी हरि आवन की।
बरसे बदरिया सावन की॥
उमड़ घुमड़ चहुँ दिसी से आयो।
दामिनी धमके झर लावन की।
बरसे बदरिया सावन की॥
नन्हे नन्हे बूंदन मेहा बरसे।
शीतल पवन सुहावन की।
बरसे बदरिया सावन की॥
मीरा के प्रभु गिरिधर नागर।
आनंद मंगल गावन की।
बरसे बदरिया सावन की॥
