कृष्ण भजन
गोविंद तुम्हारे चरणों में,
एक प्रेम पुजारी आया है,
गोविंद तुम्हारे चरणों मे,
एक दर्श भिखारी आया है ॥
मेरे हाथों में जल का लोटा है,
मैं तुम्हें नहलाने आया हूँ,
बड़े प्रेम से नहाओ मनमोहन,
मैं तुम्हें नहलाने आया हूँ॥
मेरे हाथों में रेशम वस्त्र है,
मैं तुम्हें पहराने आया हूँ,
बड़े प्रेम से पहनो मनमोहन,
मैं तुम्हें पहराने आया हूँ॥
मेरे हाथों में केसर चंदन है,
मैं तुम्हें लगाने आया हूँ,
बड़े प्रेम से लगाओ मनमोहन,
मैं तुम्हारे लगाने आया हूँ॥
मेरे हाथों में फूलों का गजरा है,
मैं तुम्हें पहराने आया हूँ,
बड़े प्रेम से पहनो मनमोहन,
मैं तुम्हें पहराने आया हूँ॥
मेरै हाथों में माखन मिश्री है,
मैं भोग लगाने आया हूँ,
बड़े प्रेम से जीमो मनमोहन,
मैं तुम्हें जिमाने आया हूँ॥
मेरे हाथों में सोने की झारी है,
मैं तुम्हें पिलाने आया हूँ,
बड़े प्रेम से पिओ मनमोहन,
मैं तुम्हें पिलाने आया हूँ॥
मेरे हाथों में झालर घंटा है,
मैं आरती करने आया हूँ,
बड़े प्रेम से आरती करने दो,
मैं आरती करने आया हूँ॥
मेरे हाथों में धूप और दीपक है,
मैं आरती करने आया हूँ,
बड़े प्रेम से आरती करने दो,
मैं आरती करने आया हूँ॥
गोविंद तुम्हारे चरणों में,
एक प्रेम पुजारी आया है,
गोविंद तुम्हारे चरणों मे,
एक प्रेम पुजारी आया है॥
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