शिव भजन
ॐ नमः शिवाय,
ॐ महादेवाय नमः,
हर श्वास में जो समाया है,
वही तू है।
शून्य भी तू, अनंत भी तू,
माया भी तू, छाया भी तू,
जीवन भी तू, मृत्यु भी तू,
शक्ति भी तू, भक्ति भी तू,
हर रूप में बस तू ही तू,
हर भावों में बस तू ही तू,
जो दिखे ना जो मिले ना
वो भी तू, तू ही तू....
जग भी तू, राग भी तू,
योग भी तू, आग भी तू,
नीर भी तू, तेज भी तू,
शब्द भी तू, मौन भी तू,
काल भी तू, रात भी भी तू,
प्राण भी तू, तांडव भी तू,
कांति भी तू, श्रृंगार भी तू,
विराग भी तू,
हर युग में तू, हर भुवन में तू,
हर मन के गूढ़ रहस्य में तू,
सांसों में रो जब भी मेरी बाजे,
वो तू ही तू, तू ही तू....
गर्व भी तू, श्राप भी तू,
वरदानों का ताप भी तू,
पर्वत भी तू, गुफा भी तू,
भस्म में लिपटा रूप भी तू,
नटराज तू, अघोर तू,
नादों का सिरमौर तू,
हर दिल का, हर रूप तू,
सांसों में छुपा स्वर तू....
हे महादेव, हे नटराज,
हर श्वास में बस तू,
तू ही तू...तू ही तू...तू ही तू...
तू ही तू...तू ही तू.......
