शिव भजन
हे दीन बन्धु दयालु शंकर,
जानि जन अपनाइयो I
भवसागर पार उतारि मोको,
निज समीप बसाइयो II
हे दीन बन्धु दयालु शंकर,
जानि जन अपनाइयो I
जाने अन्जाने पाप मेरो,
तिन्हहि नाथ नसाइओ I
करि जोरि-जोरि निहोरि माँगहु,
देव दरश दिखाइओ II
हे दीन बन्धु दयालु शंकर,
जानि जन अपनाइयो I
देवी सहाय सुनाय शिवजी को,
प्रेम सहित जो गावहीं,
छुट जाहि जगजोनि से.
सर्वदा सुख पावहीं,
हे दीन बन्धु दयालु शंकर,
जानि जन अपनाइयो I
बार बार विनती करहुँ,
धरहुँ कमल पद माथ I
निज पद भक्ति भाव देहु,
मोहि उमापति नाथ II
हे दीन बन्धु दयालु शंकर,
जानि जन अपनाइयो I
श्री गुरु चरण चित लायके,
विनय करहुँ करि जोरि I
शिव शंकर के चरण में,
लग्यो हरहे मन मोर II
भजन करहुँ भोजन करहुँ,
गावहुँ ताल तंरग I
निशदिन लव लागी रहे,
पार्वती शिव संग II
हे दीन बन्धु दयालु शंकर,
जानि जन अपनाइयो I
भवसागर पार उतारि मोको,
निज समीप बसाइयो II
हे दीन बन्धु दयालु शंकर,
जानि जन अपनाइयो I
हे दीन बन्धु दयालु शंकर,
जानि जन अपनाइयो I
भवसागर पार उतारि मोको,
निज समीप बसाइयो II
हे दीन बन्धु दयालु शंकर,
जानि जन अपनाइयो I
II पार्वती पतये हर हर हर महादेव II

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