शिव भजन
कोई कहे कैलाश बसे वो,
कोई कहे शमशानों में,
महादेव है पिता, पिता के,
प्राण बसे संतानों में ॥
आंसू अगर बुलाते हैं,
सोए प्रभु जग जाते हैं,
आंसू अगर बुलाते हैं,
सोए प्रभु जग जाते हैं,
हाँ मेरे प्रभु जग जाते हैं,
सुख में आए ना आए,
दुख में शंकर आते हैं,
सुख में आए ना आए,
दुख में शंकर आते हैं ॥
कौन घिरा है किस दुविधा में,
सारी खबर वो रखते हैं,
आंखें मूंदे बैठे हैं,
पर सब पे नजर वो रखते है,
रोते-रोते जिस दिन कोई,
भक्त कहीं सो जाता है,
मान सरोवर का पानी,
उस दिन खारा हो जाता है,
पीर प्रभु को होती है,
जब नैन कहीं भर आते हैं,
पीर प्रभु को होती है,
जब नैन कहीं भर आते हैं,
जब नैन कहीं भर आते हैं,
सुख में आए ना आए,
दुख में शंकर आते हैं,
सुख में आए ना आए,
दुख में शंकर आते हैं ॥
दुखिया देखल मन से जिस पल,
आह निकलने लगती है,
सुनते हैं कैलाश शिखर पे,
बर्फ पिघलने लगती है ॥
अंधियारों में अगर पुकारो,
बन जाए शिव साथी,
मन कुटिया में जल जाए,
कोई दीपक बिन बाती,
जिनके साथ हुआ है ऐसा,
वो ही लोग बताते हैं,
जिनके साथ हुआ है ऐसा,
वो ही लोग बताते हैं,
हां वो ही लोग बताते हैं,
सुख में आए ना आए,
दुख में शंकर आते हैं,
सुख में आए ना आए,
दुख में शंकर आते हैं ॥
सुख में आए ना आए,
दुख में शंकर आते हैं,
सुख में आए ना आए,
दुख में शंकर आते हैं ॥
