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कृष्ण भजन
श्याम नाम रस बरसे रे मनवा,
श्याम नाम रस बरसे,
श्याम नाम रस बरसे रे मनवा,
श्याम नाम रस बरसे ॥
सावन भादो जस हिरयाली,
तस् हिरयाली तन में।
जस बसंत में फुलवा खिलते,
तस फुलवारी मन में।
निरख -निरख प्रभु श्याम छबि को,
निरख -निरख प्रभु श्याम छबि को,
मनवा मोरा हरषे ॥
श्याम नाम रस बरसे रे मनवा,
श्याम नाम रस बरसे,
श्याम नाम रस बरसे रे मनवा,
श्याम नाम रस बरसे ॥
श्याम नाम में मन अस भीज़ा,
नदिया तट हो जैसे।
श्याम बिना जीवन है ऐसो ,
जल बिन मीन हो वैसे।
‘दास नारायण’ प्रभु चरणों को,
बार-बार मन तरसे ॥
श्याम नाम रस बरसे रे मनवा,
श्याम नाम रस बरसे,
श्याम नाम रस बरसे रे मनवा,
श्याम नाम रस बरसे ॥
