प्रभु भजन
साँई से सब होत है,
बन्दे से कछु नाहि।
राई से पर्वत करे,
पर्वत राई माहिं ॥
तज दिये प्राण रे, काया कैसी रोई,
तज दिये प्राण रे, तज दिये प्राण ॥
चलत प्राण काया कैसी रोई,
चलत प्राण काया कैसी रोई,
छोड़ चला निर्मोही,
हो... छोड़ चला निर्मोही,
छोड़ चला निर्मोही,
मैं जाना मेरे संग चलेगी,
मैं जाना....
मैं जाना मेरे संग चलेगी,
या हिते काया मैंने मल-मल धोई ।
तज दिये प्राण रे, काया कैसी रोई,
तज दिये प्राण रे, तज दिये प्राण।
ऊंचे-नीचे मंदिर छोड़े,
गाय-भैंस घर घोङी ।
तिरिया जो कुलवंती छोड़ी,
तिरिया जो....
तिरिया जो कुलवंती छोड़ी,
और पुत्रन की जोड़ी ।
तज दिये प्राण रे, काया कैसी रोई,
तज दिये प्राण रे, तज दिये प्राण।
मोटी धोती गजी मंगाई,
चढ़ा काठ की घोड़ी ।
चार जने तोए ले के चाले,
चार जने.....
चार जने तोए ले के चाले,
फूँक दई री जैसे फागुन की होली ।
तज दिये प्राण रे, काया कैसी रोई,
तज दिये प्राण रे, तज दिये प्राण।
भोरी तिरिया रोवन लागी,
बिछुड़ गई रे मेरी जोड़ी ।
कहत कबीर सुनो भाई साधो,
कहत कबीर.....
कहत कबीर सुनो भाई साधो,
जिन जोड़ी तिन तोड़ी ।
तज दिये प्राण रे, काया कैसी रोई,
तज दिये प्राण रे, तज दिये प्राण।
चलत प्राण काया कैसी रोई,
चलत प्राण काया कैसी रोई,
छोड़ चला निर्मोही,
हो... छोड़ चला निर्मोही,
छोड़ चला निर्मोही,
मैं जाना मेरे संग चलेगी,
मैं जाना......
मैं जाना मेरे संग चलेगी,
या हिते काया मैंने मल-मल धोई ।
तज दिये प्राण रे, काया कैसी रोई,
तज दिये प्राण रे, तज दिये प्राण॥
